World Animal Day 2020 : Day in Wold Wide Wishes
जंगली जानवरों की जंगली हालत
किताबों व लोक कथाओं में मनुष्य और जानवरों की दोस्ती के कई किस्से मशहूर हैं. जानवर मनुष्य का सबसे अच्छा दोस्त भी माना गया है और इनकी दोस्ती की कई मिसालें दी जाती हैं. लेकिन कुछ वर्षों से जंगली जानवरों ने मानव बस्तियों पर हमला कर मनुष्य को ही शिकार बनाना शुरू कर दिया है. एक जमाने में दोनों अपने-अपने क्षेत्र का उपयोग कर शांतिपूर्वक रह रहे थे. विकास की बयार और आगे निकलने की होड़ में जब मानव ने जानवरों के क्षेत्र में अपना अधिकार जमाने के प्रयास किए तो मामला पेचीदा हुआ. मनुष्य ने अपने स्वार्थ के लिए पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया और जंगलों का कटान कर बस्तियां बसाई. इसी जद्दोजहद में जब जंगली जानवरों के रहने के लिए घर नहीं रहा व भोजन तलाशने में दिक्कत हुई तो मजबूरन उन्हें मानवीय बस्तियों का रुख करना पड़ा. यही कारण है कि जानवर हिंसक हुए और बस्तियों पर इनके हमले बढ़े हैं.
माइक्रोचिप से पशुओं की रक्षा
पिछले साल ही इंजीनियरिंग पूरी करने वाले जबी के अनुसार,वे एक सस्टेनेबल मॉडल तैयार करने में कामयाब रहे हैं। कॉलेज में एक अनूठी योजना शुरू की गई है, जिसके तहत एनिमिल एक्टिविज्म से जुड़े युवाओं के लिए नि:शुल्क एक सीट उपलब्ध कराने के साथ उन्हें चार लाख रुपये की स्कॉलरशिप भी प्रदान की जाएगी। इसके बदले उन्हें शेल्टर होम के पशुओं की जिम्मेदारी लेनी होगी। जबी ने तेलंगाना सरकार के साथ मिलकर एक एनिमल सैंक्चुअरी भी शुरू किया है, जहां कुत्तों के साथ अन्य पशुओं की भी देखभाल की जाएगी। वे चाहते हैं कि इस समस्या का जड़ से समाधान निकाला जाए। जबी कहते हैं,‘जब तक एक जवाबदेही तय नहीं की जाएगी, तो लोग यूं ही पशुओं को सड़क पर छोड़ते रहेंगे। इस क्रम को तोड़ना जरूरी है,इसलिए हम कानून के साथ कुछ इनोवेटिव आइडियाज पर काम कर रहे हैं। जैसे, हम तेलंगाना के पशुपालन विभाग के सहयोग से प्रत्येक पालतू पशु में माइक्रोचिप लगाने का काम कर रहे हैं। इसमें पशुओं के शरीर में माइक्रोचिप इंजेक्ट किया जाता है, जिस पर एक यूनीक आइडेंटिफिकेशन नंबर होता है। यह ओनर का आधार या पैन कार्ड नंबर हो सकता है।’पालतू पशुओं के कारोबारियों से लेकर पेट ओनर्स को यह चिप लगवानी होगी। वेटरिनरी डॉक्टर उन्हीं पशुओं को देखेंगे, जिनमें माइक्रोचिप लगा होगा। इससे एक डाटा बेस तैयार करने में मदद मिलेगी और दोषी व्यक्तियों की पहचान आसान होगी, ताकि उन्हें रेड फ्लैग दिया जा सके। जबी के अनुसार, हम सभी पेट थेरेपी की महत्ता को जानते हैं। इसी के तहत जेल के कैदियों के साथ एक कार्यक्रम शुरू करने की योजना है,जहां हरेक कैदी को हफ्ते में दो दिन एक पशु की देखभाल करनी होगी। इससे जब वे बाहर आएंगे, तो उनमें दया की भावना अधिक होगी। हम कैंसर अस्पतालों, स्कूलों में भी इस तरह के कार्यक्रम शुरू करने पर विचार कर रहे हैं।
बंदर, सुअर व नील गाय लोगों की फसलों के दुश्मन बने हैं. रातोंरात किसानों की खड़ी फसल चट होती रही है. जंगलों पर कुल्हाड़ी चलाने के परिणाम हमारे सामने हैं और हमें यह तब तक भुगतने पड़ सकते हैं जब तक कि हम जंगली जानवरों को उनके रहने की जगह यानि जंगल वापस नहीं कर देते. यह तभी संभव है जब मानव जंगल में अतिक्रमण न करे और जानवरों को शांतिपूर्वक रहने दे क्योंकि जानवर तभी हिंसक होता है जब उसे अपनी जान को खतरा महसूस होता है.
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